आगे उस शख्स ने कुरआन पर एतराज़ करते हुए कहा, ‘(सूरे क़यामत आयत 22-23) उस रोज़ बहुत से चेहरे तरोताजा होंगे और अपने परवरदिगार की तरफ देख रहे होंगे।’ और दूसरी जगह वह कहता है, ‘(सूरे इनाम आयत 104) उस को आँखें नहीं देख सकती हैं और वह (लोगों की) निगाहों को देखता है। वह लतीफ खबीर है। और कहता है कि ‘(नज्म 13-14) और उन्होंने उस को एक बार और देखा है सिदरतुल मुन्तहा के नज़दीक।’
और ये भी फरमाता है कि ‘(ताहा 109-110) उस दिन किसी की सिफारिश काम न आयेगी मगर जिस को खुदा ने इजाज़त दी हो और उस का कौल उस को पसंद आये। जो कुछ उन के सामने है और जो कुछ उन के पीछे है वह जानता है और ये लोग अपने इल्म के जरिये उसपर हावी नहीं हो सकते।’
और जिस की निगाहें उस तक पहुंच जायें तो गोया उन का इल्म हावी हो गया। तो भला ये किस तरह हो सकता है?
अब जवाब में हजरत इमाम अली (अ-स-) ने फरमाया कि जिस जगह पर औलिया अल्लाह(अल्लाह के करीबी बन्दे) हिसाब से फारिग होने के बाद एक नहर पर पहुंचेंगे जिस का नाम नहरे हीवान होगा तो वह उसमें गुस्ल करेंगे और उस का पानी पियेंगे तो उन के चेहरे चमक दमक के साथ खूबसूरत नज़र आयेंगे और उन से हर तरह की परेशानी दूर हो जायेगी। फिर उनको जन्नत में दाखिल होने का हुक्म दिया जायेगा तो इस जगह से वह अपने परवरदिगार की तरफ से देखेंगे कि वह उनको किस तरह का बदला यानि फल देता है और उनमें से कुछ लोग जन्नत में दाखिल हो जायेंगे। इसी बिना पर अल्लाह का कौल है, ‘उस रोज़ बहुत से चेहरे तरोताजा होंगे और अपने परवरदिगार की तरफ देख रहे होंगे।’ यहाँ अल्लाह की तरफ देखने से मतलब ये है कि वह उस के सवाब को देखेंगे। मगर उस के कौल ‘उस को आँखें नहीं देख सकती हैं’ का मतलब ये है कि इंसानी अक्ल व आँखें उस तक नहीं पहुंच सकतीं। और ‘वह (लोगों की) निगाहों को देखता है।’ का मतलब कि वह उन तक पहुंच सकता है और वह लतीफ खबीर है। और यह एक तारीफ है जिस के जरिये हमारे रब ने अपनी ज़ात की तारीफ फरमाई है। और इन्तिहाई बलन्दी के साथ पाक व पाकीजा हुआ।
और अल्लाह के इस कौल ‘और उन्होंने उस को एक बार और देखा है सिदरतुल मुन्तहा के नज़दीक।’ से मतलब ये है कि हज़रत मोहम्मद(स-अ-) ने जिब्रील को सिदरतुल मुन्तहा के मुकाम पर देखा जहाँ मखलूके खुदा में किसी का गुजर नहीं हो सकता। और आखिरी आयत में उसका ये कहना कि ‘(नज्म 17-18) उन की आँख किसी दूसरी तरफ मायल हुई और न हद से आगे बढ़ी उन्होंने अपने परवरदिगार की बड़ी निशानियाँ देखीं।’ उन्होंने जिब्रील को उस की खिलकत की सूरत में दूसरी बार देखा। और इस का सबब ये है कि अल्लाह ने जिब्रील को पैदा किया जो उन रूहानियों में से है जिन के खल्क के राज़ो का परदा सिवाय अल्लाह के कोई नहीं हटा सकता। ‘ये लोग अपने इल्म के जरिये उसपर हावी नहीं हो सकते।’ से मतलब ये है कि कोई भी मखलूक अपने इल्म यानि ज्ञान के जरिये अल्लाह की हस्ती तक नहीं पहुंच सकती। क्योंकि उस अल्लाह की बुलन्द ज़ात ने लोगों के दिलों पर परदा डाल दिया है। न कोई अक्ल व दिमाग उस की कैफियत से वाकिफ हो सकता है और न कोई दिल उसकी हदों या सीमाओं से वाकिफ हो सकता है। फिर न कोई उसका गुण बयान कर सकता है जिस तरह कि उस ने अपने गुणों को बयान किया है। उस जैसी कोई शय नहीं है। वह समीअ-बसीर है वही अव्वल व आखिर है। वही जाहिर व बातिन है। वह खलिक है। उस ने चीजों को खल्क किया। चीज़ों में से कोई चीज उस की तरह नहीं है। उस की ज़ात बाबरकत और बुलन्द व बाला है।
(-----जारी है।)
सन्दर्भ : शेख सुद्दूक(र-) की किताब अल तौहीद
nice post
ReplyDeleteBahut achha likha hai
ReplyDeleteकुरआन में गलतियाँ नहीं हैं।
ReplyDeleteगलतियाँ हैं उन लोगों के नजरिए में जो द्वेष और अहंकार के साथ कुरआन पढ़ते हैं ।
ReplyDeleteकुरआन की जिस बात पर ऐतराज करते हैं वे अपने मत की वैसी ही बात की तारीफ करते हैं ।
ReplyDeleteJisne etraz karne ka man hi banaya hua hai, vo to bina matlab ke bhi etraz karta rahega, yeh log jaanne ke liye nahi balki etraaz karne ke liye etraaz karte hai
ReplyDeleteZeeshan bhai, aapki koshish badhia hai, very nice.
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी पेशकश है जीशान भाई की, जज़ाक अल्लाह!
ReplyDeletebahut kuchh janne ko mil raha hai
ReplyDelete