यह एतराज़ात इमाम हज़रत अली(अ-स-) के सामने एक शख्स ने पेश किये थे और हज़रत अली(अ-स-) ने उनका जवाब दिया था।
पहला एतराज उस शख्स ने इस तरह पेश किया:
‘‘सूरे आराफ की 51वीं आयत में है, ‘तो हम(अल्लाह) भी आज उनको भूल जायेंगे जिस तरह ये आज के दिन की मुलाकात को भूल गये।’ जबकि सूरे मरियम की 65 वीं आयत में है, ‘और तुम्हारा रब भूलने वाला नहीं।’ तो कभी अल्लाह खबर देता है कि वह भूल जाता है तो कभी आगाह करता है कि वह नहीं भूलता। ये किस तरह मुमकिन है?’’
इसके जवाब में इमाम हजरत अली(अ-स-) ने फरमाया, ‘‘पहली आयत से मतलब ये निकलता है कि जो लोग दुनिया में अल्लाह को भूल गये यानि उसकी बातों पर अमल नहीं किया तो ऐसे लोगों को वह अपने सवाब में से कुछ भी नहीं देगा यानि ऐसे लोगों को कयामत के दिन अल्लाह की मेहरबानियों में से कुछ भी हासिल नहीं होगा।
जबकि दूसरी आयत में भूलने से मतलब गाफिल होने से है। यानि जैसे कि किसी के ज़हन से कोई बात निकल जाये। तो अल्लाह इससे बहुत बुलन्द है।
दूसरा एतराज उस शख्स ने ये पेश किया, ‘‘सूरे नबा की 38 वीं आयत है ‘जिस दिन रूह और फ़रिश्ते सफबस्ता खड़े होंगे उस से कोई बात नहीं कर सकेगा मगर जिस को इन्तिहाई मेहरबान अल्लाह इजाज़त दे और दुरुस्त बात कहे।’ और उसने कहा कि उन को बोलने की इजाज़त दी गयी तो वह कहने लगे, ‘(सूरे अनाम की 23 वीं आयत ) और अल्लाह की कसम जो हमारा रब है हम मुशरिक नहीं हैं।’ फिर सूरे अन्कुबूत की 25 वीं आयत है, ‘फिर कयामत के दिन तुममें से एक दूसरे का इंकार करेगा और एक दूसरे पर लानत करेगा।’ और उसने ये भी कहा कि (सूरे साद 64 वीं आयत) ‘बेशक अहले जहन्नुम का आपस में लड़ना बिल्कुल दुरुस्त है।’ और ये भी फरमाया (सूरे क़ाफ 28 वीं आयत) ‘मेरे सामने झगड़ा न करो और मैंने पहले ही अज़ाब की खबर दे दी थी।’ सूरे यास की 65 वीं आयत में उसने कहा, ‘हम उनके लबों पर मुहर लगा देंगे और उन के हाथ हम से बातें करेंगे और उन के पाँव गवाही देंगे उस के मुताल्लिक जो वह करते रहे हैं।
इस तरह कभी अल्लाह कहता है कि वह कलाम करेंगे तो कभी खबर देता है कि वह बात नहीं करेंगे मगर जिस को रहमान इजाज़त दे और सही बात कहे। और कभी यह कहता है कि मखलूक गुफ्तगू नहीं करेगी और फिर उनकी गुफ्तगू के बारे में कहता है ‘कसम खुदा की वह हमारा रब है हम मुशरिक नहीं हैं।’ और कभी ये बताता है कि वह झगड़ा करते हैं। ये किस तरह मुमकिन है?’’
इसके जवाब में इमाम हजरत अली(अ-स-) ने फरमाया, कि ये सारी बातें कयामत के रोज अलग अलग वक्त में होंगी। कयामत का दिन पचास हज़ार साल लंबा है, जिसमें अल्लाह तमाम लोगों को जमा करेगा जो अलग अलग जगहों में होंगे और एक दूसरे से कलाम करेंगे। और एक दूसरे के लिये भलाई की दुआ करेंगे। ये वो लोग होंगे जो हक़वालों के सरदारों में से होंगे, जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इताअत की होगी। और उन गुनाहगार लोगों पर लानत करेंगे जिन से नफरत व अदावत का इजहार हुआ और जिन्होंने दुनिया में जुल्म व जबर पर एक दूसरे की मदद की।
गुनाहगार व जालिम एक दूसरे को काफिर कहेंगे और एक दूसरे पर लानत करेंगे। फिर वह एक दूसरी जगह पर जमा होंगे जहाँ वह रोएंगे। अगर ये आवाजें दुनिया वाले सुन लें तो अपने सारे काम धंधे छोड़ दें और उनके दिल फट जायें। इसके बाद वह दूसरी जगह जमा होंगे तो बातें करेंगे और कहेंगे कि ‘कसम खुदा की हमारे रब, हम मुशरिक नहीं थे।’ फिर अल्लाह उन के मुंह पर मुहर लगा देगा और हाथ पैर व खालें बोलने लगेंगी। फिर जिस्म के हिस्से उन के हर गुनाह की गवाही देंगे। फिर उन की जबानों से मुहरों को हटा लिया जायेगा तो वह अपने जिस्म के हिस्सों से कहेंगे तुमने हमारे खिलाफ किस वजह से गवाही दी? तो वह कहेंगे कि हम को उस अल्लाह ने बोलने की ताकत दी जिसने हर शय को कूव्वते फहम अता की।
इस तरह कुरआन की ये आयतें एक दूसरे से अलग नहीं हैं। (-----जारी है।)
सन्दर्भ : शेख सुद्दूक (अ.र.) की किताब अल तौहीद
गुफ्तगू काफी लम्बी है इसलिये इसको दो तीन किस्तों में पेश करूंगा।
हर एक सवाल का बहुत अच्छा और काबिले गौर जवाब दिया हज़रात अली (र.) ने
ReplyDeleteअगली कड़ी का इंतज़ार रहेगा
ReplyDeleteबेहतरीन लेख है, हज़रत अली (करमल्लाहू वज्हू) के द्वारा दी गए जवाब भी बेहतरीन हैं.
ReplyDeleteVery impressive post, keep it up
ReplyDeleteMashallah, whole website is a great work! Jazakallah
ReplyDeleteजीशान भाई, बहुत अच्छा आर्टिकल लिखा है आपने, इन सवालों का जवाब हज़रत अली ने बहुत अच्छे से दिए हैं.
ReplyDeleteआगे के सवाल-जवाब कब लिखेंगे, ईमेल पर ज़रूर बता देना, मैं इन्टरनेट पर कभी-कभी ही आ पता हु
ReplyDeleteYeh lekh future ke liye ek Nazeer banega, aisa mujhe lagta hai. Badhia work Zeeshan, Good!
ReplyDeleteईश्वर अजर है ,अमर है ।
ReplyDeleteक़ुरआन भी अजर है अमर है ।
ReplyDelete1- अजर है क्योंकि कुरआन में कुछ बढ़ाया नहीं गया है आज तक ।
2- अमर है क्योंकि इसकी भाषा आज भी जीवित है। इसकी भाषा मृत नहीं है ।
यह बात दुनिया की किसी धार्मिक ग्रंथ को हासिल नहीं है ।
ईश्वर के गुण उसकी वाणी में भी प्रकट हैं । कुरआन ईश्वर की वाणी है । उसमें गलतियाँ नहीं हैं, जो निष्पक्ष होकर विचारेगा वह यह सत्य जान लेगा ।
ReplyDeleteहठधर्मी वही करेगा जिसे सत्य की चाहत नहीं है ।
अच्छी पोस्ट
ReplyDeleteदुनिया के हर प्रश्न का उत्तर कुरान में है बस उसे तलाशने वाली आंख चाहिए और दिल में तड़प चाहिए
ReplyDeletedabirnews.blogspot.com